HERBAL GARDEN

लांगली

Classification

Synoyms

लांगली
सुपर्णिका
नागकमला
रत्नज्योति

Habit

बहुवर्षीय, आरोही बेल

Habitat

भारत के शुष्क व आर्द्र क्षेत्रों में जंगलों की किनारी, झाड़ियों और पहाड़ी क्षेत्रों में उगती है। यह श्रीलंका, अफ्रीका और दक्षिण-एशियाई उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी पाई जाती है।

Morphology

  • तना (Stem)- लम्बी, आरोही, मांसल और हरे रंग की बेल।
  • पत्ते (Leaves)- लम्बे, भालाकार, नुकीले।
  • फूल (Flowers)- लाल और पीले रंग के, लौ की भाँति फैलते हुए।
  • कंद (Rhizome)- मोटा, लम्बा, रेशेदार और विषारी।
  • बीज (Seeds)- लाल, अंडाकार, विषारी।

Chemical Composition

एल्कलॉइड्स (Colchicine, Gloriosine)
फ्लेवोनॉयड्स स्टार्च, प्रोटीन
आवश्यक तेल
टैनिन और गम

Guna-Karma

Rasa- कटु, तिक्त
Guna- तीक्ष्ण, लघु, विषारी
Virya- उष्ण
Vipaka- कटु
Karma-कृमिघ्न, विषघ्न, शोथहर, व्रणरोधक, दर्दनाशक, ज्वरहर
Doshakarma- कफ-वात शमन, पित्तवर्धक

Medicinal uses

आंतरिक और बाह्य कृमिरोग में उपयोगी
जोड़ों के दर्द, गठिया और स्नायुशोथ में लाभकारी
त्वचा रोग, फोड़े एवं घावों में व्रणरोधक
सर्पदंश और विषैले जानवर के काटने में विषहर
रक्तशोधन और ज्वर निवारक
अत्यधिक सावधानी के साथ औषधि रूप में उपयोग

Useful Part

कंद (Rhizome), पत्ते, बीज (सावधानी से)

Doses

कंद चूर्ण : 1–2 ग्राम (अत्यंत सावधानी से)
क्वाथ : 10–20 मिलीलीटर
बाह्य उपयोग : लेप के रूप में

Important Formulation

लांगली कंद चूर्ण (कृमि नाशक)
बाह्य लेप (व्रण व शोथ के लिए)
संयुक्त योग (स्नायु रोग व गठिया में)

Shloka

लांगली कटुका तिक्ता कृमिघ्नी शोथपाण्डुप्रणाशिनी।
विषघ्नी ज्वरहराश्च व्रणशोधक बलवर्धिनी॥
"लांगलीतिक्तकातीक्ष्णावेदनास्तम्भनाऽनिलहृद्रुति।
व्रणशोथज्वरच्छर्दिक्षयार्शःकुष्ठनाशिनी॥" (भावप्रकाशनिघण्टु)

Hindi Name​

लांगली, अस्फोटिका, नागकमल

English Name

Flame Lily, Climbing Lily, Glory Lily

Botanical Name

Gloriosa superba L.

Family

Liliaceae