HERBAL GARDEN

हंसराज (Hansraj)

Classification

Synoyms

हंसपदी
त्रिपर्णिका
मयूरशिखा

Habit

शाकीय, शाकाहारी, और शीतल गुण वाला स्थायी पौधा है।

Habitat

हंसराज आर्द्र, छायादार स्थानों पर, जैसे चट्टानों, वृक्षों की छालों और नमी वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। यह विशेष रूप से मानसून के मौसम में उगता है।

Morphology

  • पत्तियाँ (Fronds): नाजुक, हरे रंग की, पंखुड़ी जैसी, त्रिकोणीय आकार की।
  • तना (Stem): पतला, काले रंग का, स्केलयुक्त।
  • मूल (Rhizome): रेंगने वाला, पतला।

Chemical Composition

इसमें कैरोटेनॉइड्स, फ्लेवोनॉइड्स, नॉर्ट्राइटरपीन-एडियंटोन जैसे यौगिक पाए जाते हैं।

Guna-Karma

Rasa- तिक्त, कषाय
Guna- गुरु , शीता
Virya- शीत
Vipaka- कटु
Karma- विषघ्न, रक्तविकारहर, शीतल
Doshakarma- पित्त और कफ को शांत करने वाला

Medicinal uses

दस्त और अतिसार (Diarrhea and Dysentery): पत्तियों का काढ़ा 50-100 मि.ली. सेवन करें।
खांसी और दमा (Cough and Asthma): पत्तियों का काढ़ा श्वसन तंत्र को शुद्ध करता है।
बुखार (Fever): पित्तजन्य बुखार में शीतल प्रभावी।
विषैले दंश (Poisonous Bites): मकड़ी या बिच्छू के काटने पर पत्तियों का लेप करें।
घाव और जलन (Wounds and Burns): पत्तियों का लेप घावों और जलन में लाभकारी।
मासिक धर्म विकार (Menstrual Disorders): पत्तियों का काढ़ा मासिक धर्म में अनियमितता को सुधारता है।
पाचन समस्याएँ (Digestive Issues): पाचन क्रिया को सुधारने में सहायक।

Useful Part

पौधे के सभी भागों का उपयोग किया जाता है, विशेष रूप से पत्तियाँ और मूल।

Doses

पत्तियों का काढ़ा: 50-100 मि.ली.
पत्तियों का लेप: स्थानीय उपयोग के लिए।
पाउडर: 2-4 ग्राम, शहद या घी के साथ।

Important Formulation

हंसपदी तेल (Hanspadi Taila): त्वचा रोगों के उपचार में।
मुक्तापंचामृत रसा (Muktapanchamrita Rasa): रक्त विकारों के लिए।
स्वर्णभूपति रसा (Swarnabhupati Rasa): सामान्य स्वास्थ्य के लिए।

Shloka

"त्रिपर्णिका हंसपदी रक्तपित्तविनाशिनी।

Hindi Name​

हंसराज, हंसपदी, समलापत्ति

English Name

Maidenhair Fern, Walking Maidenhair Fern

Botanical Name

Adiantum lunulatum Burm. f.

Family

Pteridaceae (Adiantaceae)