HERBAL GARDEN
अंकोल
Classification
Synoyms
अंकोल
कुष्ठनाशन
अकुल,
अंगोल
अंगुल
Habit
मध्यम आकार का पर्णपाती वृक्ष
Habitat
भारत के उपोष्ण एवं उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में, विशेषकर मैदानी भागों, बाड़ों, और खेतों की मेड़ों पर पाया जाता है। श्रीलंका, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी मिलता है।
Morphology
- ऊँचाई – 8–12 मीटर
-
तना – धूसर या भूरे रंग का, खुरदरी छाल वाला
-
पत्ते – एकांतर, सरल, अंडाकार, लम्बाई 6–12 से.मी., ऊपर की सतह चिकनी
-
फूल – छोटे, सफेद या हल्के पीले, सुगंधित, गुच्छों में लगते हैं
-
फल – अंडाकार, पकने पर बैंगनी-काले, भीतर एक बीज युक्त
- बीज – कठोर, तैलीय
Chemical Composition
बीज में स्थिर तेल, फिक्स्ड ऑइल, ऐल्कलॉइड्स, फ्लेवोनॉयड्स, टैनिन, और सैपोनिन पाए जाते हैं।
बीज तेल में oleic acid, linoleic acid, palmitic acid और stearic acid होते हैं।
Guna-Karma
Rasa- कटु, तिक्त, कषाय
Guna- लघु, रूक्ष
Virya- उष्ण
Vipaka- कटु
Karma- कुष्ठघ्न, कृमिघ्न, व्रणरोपण, शोथहर, वेदनास्थापन, दीपनीय
Doshakarma- कफ-वत्शामक, पित्तवर्धक
Medicinal uses
कुष्ठ एवं त्वचा रोगों में
कृमिनाशक के रूप में
व्रण एवं अल्सर में
शोथ व सूजन कम करने में
बिच्छू एवं सांप के विष में पारंपरिक प्रयोग
दाँत दर्द व मुख रोगों में कुल्ला करने हेतु
ज्वर एवं वातरोग में सहायक
Useful Part
बीज, छाल, पत्ते, जड़
Doses
बीज चूर्ण – 1–3 ग्राम
बीज तेल – 2–5 बूँद (बाह्य प्रयोग हेतु)
काढ़ा – 30–50 मि.ली.
Important Formulation
अंकोल बीज चूर्ण
अंकोल तेल
कुष्ठ एवं कृमि नाशक योगों में सम्मिलित
Shloka
अंकोलबीजं कुष्ठेषु कृमिषु विषनाशनम्।
व्रणशोथज्वरार्तानां हितं तद्भिषगुच्यते॥
Hindi Name
अंकोल, अंकुल
English Name
Sage-leaved alangium
Botanical Name
Alangium salvifolium (Linn.f.) Wang
Family
Alangiaceae
